तर्ज़-ए-‘मोमिन’ में मरहबा ‘हसरत’
तेरी रंगीं-निगारियाँ न गईं
ज़ेब और हानिया की यह तस्वीर 2011 में मैंने ली थी. इनके जलवे देखना है तो कोक स्टूडियो का रुख़ करें...
@pkray11.bsky.social
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तर्ज़-ए-‘मोमिन’ में मरहबा ‘हसरत’
तेरी रंगीं-निगारियाँ न गईं
ज़ेब और हानिया की यह तस्वीर 2011 में मैंने ली थी. इनके जलवे देखना है तो कोक स्टूडियो का रुख़ करें...
चमन में इख़्तिलात-ए-रंग-ओ-बू से बात बनती है
हमीं हम हैं तो क्या हम हैं, तुम्हीं तुम हो क्या तुम हो?
- सरशार सैलानी (पंडित रतन नाथ धर)
स्वागत…